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TRE-4 अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला : आरवाईए
पटना में शुक्रवार को TRE-4 अभ्यर्थियों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज की आरवाईए ने कड़ी निंदा की है। इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के राज्य सचिव एवं पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन ने जारी बयान में कहा कि अपने भविष्य और रोजगार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस द्वारा जिस तरह दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां बरसाई गईं, वह भाजपा-जदयू सरकार की दमनकारी मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं के हाथों में कल देश और समाज की शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी होगी, आ


यूजीसी रेगुलेशन लागू करने की मांग पर पटना में राजभवन मार्च, हजारों छात्र-नौजवान उतरे सड़कों पर:
यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लागू करने, SC/ST/EBC/BC वर्गों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी बनाने तथा संसद से रोहित एक्ट बनाने की मांग को लेकर बुधवार को राजधानी पटना में हजारों छात्र-नौजवानों ने आक्रोशपूर्ण राजभवन मार्च निकाला। ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले आयोजित इस मार्च में आरवाईए,आइसा सहित कई अन्य संगठनों के विभिन्न जिलों से आए छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता ने भाग लिया यह मार्च गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से शुरू होकर जेपी गोलंबर तक पहुंचा,जहां पुलिस द्वारा लगाए गए बैर


झूठे मुकदमे में कॉ जितेंद्र पासवान को आजीवन सजा के खिलाफ बिहार में राज्यव्यापी प्रतिवाद मार्च
आरवाईए के बिहार राज्य अध्यक्ष कॉमरेड जितेंद्र पासवान सहित दो साथियों को झूठे मुकदमे में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के खिलाफ भाकपा (माले) और आरवाईए के राज्यव्यापी आह्वान पर बिहार के विभिन्न जिलों में व्यापक प्रतिवाद मार्च निकाले गए। सड़कों पर उतरे मजदूरों, किसानों, छात्रों और युवाओं ने इसे न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध का फैसला बताते हुए न्यायपालिका से पुनर्विचार की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि 13 फरवरी को गोपालगंज जिला न्यायालय ने कॉमरेड जितेंद्र पासवान तथा कॉमरेड श्


बिहार की धरती पर अपराध और बुलडोजर का राज नहीं,इंसाफ का राज चलेगा:
बिहार आज एक गहरे और खतरनाक दौर से गुजर रहा है। यह दौर राज्य सत्ता द्वारा संगठित अन्याय, दमन और भय के राज का है। एक ओर हत्या, लूट, बलात्कार, अपहरण और सामंती-माफियाई हिंसा आम जनता की रोज़मर्रा की सच्चाई बनती जा रही है। दूसरी ओर नीतीश–मोदी की साझा सरकार बुलडोजर को “सुशासन” का मुखौटा पहनाकर गरीबों, दलितों, महादलितों और मेहनतकशों पर सीधा हमला कर रही है। बिहार में आज कानून का नहीं, बल्कि सत्ता-संरक्षित अपराधियों और बुलडोजर का बोलबाला है। राज्य में अपराध बेलगाम हैं। छोटे-छोटे विवादो


नरकटियागंज में आरवाईए बिहार राज्य परिषद की दो दिवसीय बैठक संपन्न, बजट सत्र में विधानसभा मार्च का ऐलान:
पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज में इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) बिहार राज्य परिषद की दो दिवसीय बैठक 10- 11 जनवरी को संपन्न हुई। बैठक में बिहार भर से आए राज्य परिषद सदस्यों के साथ-साथ संगठन के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने भाग लिया। बैठक में बिहार के नौजवानों के सामने खड़े रोजगार संकट, सरकार की नीतियों और आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद आरवाईए ने ऐलान किया कि बिहार विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान हजारों नौ


नागरिक अधिकारों की बात करने वाले उमर-शरजील को बिना ट्रायल जेल वहीं बलात्कारी गुरमीत सिंह को 15वीं बार पैरोल।
5 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने गुलफिशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा उर रहमान, मोहम्मद सलीम ख़ान और शादाब अहमद को ज़मानत दे दी, लेकिन उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने उन्हें यह ‘अनुमति’ दी है कि वे एक वर्ष बाद या संरक्षित गवाहों के बयान दर्ज हो जाने के बाद—जो भी पहले हो—दोबारा ज़मानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह न्याय का घोर मज़ाक है कि पाँच साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बावजूद ना तो कोई ट्रायल चलाया जा रहा है और ना ही ज़मानत दी जा रह


बलात्कारियों को संरक्षण, पीड़िताओं पर दमन यही है मोदी राज का असली चरित्र
बलात्कारी और हत्यारे कुलदीप सिंह सेंगर को ज़मानत मिल जाना कोई साधारण न्यायिक घटना नहीं है। यह उस सड़े-गले, स्त्री-विरोधी और सत्ता-संरक्षित तंत्र का नग्न प्रदर्शन है, जिसमें अपराधी सत्ता के संरक्षण में आज़ाद घूमते हैं और न्याय माँगने वाली महिलाएँ पुलिस की लाठियों और हिरासत का शिकार बनती हैं। यह फैसला केवल एक व्यक्ति को ज़मानत देने का मामला नहीं, बल्कि यह मोदी सरकार और भाजपा-आरएसएस के महिला-विरोधी चरित्र पर एक और काला धब्बा है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव से पूर्व भाजपा विधायक कुलदी


अरावली की लूट को सुप्रीम कोर्ट की ढाल,मोदी सरकार का पर्यावरण-विरोधी एजेंडा बेनकाब
ऐसे दौर में जब दिल्ली और उसके आसपास का पूरा इलाका ज़हरीली हवा में दम घुटने की कगार पर है, जब मज़दूर, गरीब, बच्चे और बुज़ुर्ग प्रदूषण के सीधे शिकार बन रहे हैं ठीक उसी समय फ़ासीवादी मोदी सरकार के नेतृत्व में, देश की सबसे प्राचीन और संवेदनशील पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली को पूँजीवादी लूट के हवाले करने में जुटी हुई है। 20 नवम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच द्वारा दिया गया हालिया फ़ैसला इसी लूट-नीति की कड़ी है, जिसने अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा को बदलते हुए बड़े पैम
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