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नागरिक अधिकारों की बात करने वाले उमर-शरजील को बिना ट्रायल जेल वहीं बलात्कारी गुरमीत सिंह को 15वीं बार पैरोल।
5 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने गुलफिशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा उर रहमान, मोहम्मद सलीम ख़ान और शादाब अहमद को ज़मानत दे दी, लेकिन उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने उन्हें यह ‘अनुमति’ दी है कि वे एक वर्ष बाद या संरक्षित गवाहों के बयान दर्ज हो जाने के बाद—जो भी पहले हो—दोबारा ज़मानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह न्याय का घोर मज़ाक है कि पाँच साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बावजूद ना तो कोई ट्रायल चलाया जा रहा है और ना ही ज़मानत दी जा रह


बलात्कारियों को संरक्षण, पीड़िताओं पर दमन यही है मोदी राज का असली चरित्र
बलात्कारी और हत्यारे कुलदीप सिंह सेंगर को ज़मानत मिल जाना कोई साधारण न्यायिक घटना नहीं है। यह उस सड़े-गले, स्त्री-विरोधी और सत्ता-संरक्षित तंत्र का नग्न प्रदर्शन है, जिसमें अपराधी सत्ता के संरक्षण में आज़ाद घूमते हैं और न्याय माँगने वाली महिलाएँ पुलिस की लाठियों और हिरासत का शिकार बनती हैं। यह फैसला केवल एक व्यक्ति को ज़मानत देने का मामला नहीं, बल्कि यह मोदी सरकार और भाजपा-आरएसएस के महिला-विरोधी चरित्र पर एक और काला धब्बा है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव से पूर्व भाजपा विधायक कुलदी


अरावली की लूट को सुप्रीम कोर्ट की ढाल,मोदी सरकार का पर्यावरण-विरोधी एजेंडा बेनकाब
ऐसे दौर में जब दिल्ली और उसके आसपास का पूरा इलाका ज़हरीली हवा में दम घुटने की कगार पर है, जब मज़दूर, गरीब, बच्चे और बुज़ुर्ग प्रदूषण के सीधे शिकार बन रहे हैं ठीक उसी समय फ़ासीवादी मोदी सरकार के नेतृत्व में, देश की सबसे प्राचीन और संवेदनशील पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली को पूँजीवादी लूट के हवाले करने में जुटी हुई है। 20 नवम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच द्वारा दिया गया हालिया फ़ैसला इसी लूट-नीति की कड़ी है, जिसने अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा को बदलते हुए बड़े पैम


अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ां– रामप्रसाद बिस्मिल शहादत दिवस के मौके पर देशभर में हुआ कैंडल मार्च- "साझी शहादत-साझी विरासत" को जिंदा रखने का लिया गया संकल्प।
अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ां और रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ के शहादत दिवस के अवसर पर आरवाईए ने देश भर में “एक शाम साझी शहादत – साझी विरासत के नाम” कार्यक्रम का आयोजन किया। कैंडल मार्चों के माध्यम से आज़ादी आन्दोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, उनकी जिंदगी, उनके विचारों और प्रेरणा देने वाले किस्सों को याद किया गया, साथ ही आज़ादी की लड़ाई में सांप्रदायिक नफ़रत के खिलाफ़ साझे सपनों, साझे संघर्षों और साझी कुर्बानियों पर चर्चा हुई। नौजवानों ने शहीदों के "सपनों के भारत" के लिए संघर्ष को तेज़ करने क
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