पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज में इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) बिहार राज्य परिषद की दो दिवसीय बैठक 10- 11 जनवरी को संपन्न हुई। बैठक में बिहार भर से आए राज्य परिषद सदस्यों के साथ-साथ संगठन के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने भाग लिया। बैठक में बिहार के नौजवानों के सामने खड़े रोजगार संकट, सरकार की नीतियों और आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के बाद आरवाईए ने ऐलान किया कि बिहार विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान हजारों नौजवानों के साथ पटना में मार्च किया जाएगा। इस मार्च के जरिए “1 करोड़ रोजगार देने”, “सभी बेरोजगार नौजवानों को 10 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देने”, “प्राइवेट संस्थानों में आरक्षण लागू करने” जैसे सवालों को मजबूती से उठाया जाएगा। आरवाईए नेताओं ने कहा कि इन मांगों को लेकर पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर नौजवानों को गोलबंद किया जाएगा और पटना पहुंचकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।
बैठक को संबोधित करते हुए आरवाईए के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों में देश के नौजवानों पर भारी तबाही थोपी है और इसकी दोहरी मार बिहार के नौजवान झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के नाम पर बिहार में “डबल बुलडोजर” की सरकार चल रही है, जहां रोजगार के अवसर छीने जा रहे हैं और नौजवानों को कॉरपोरेट के लिए सस्ते श्रमिक के रूप में काम करने को मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए न सिर्फ निजी बल्कि सरकारी संस्थानों में भी भर्तियां की जा रही हैं, जहां न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन दिया जा रहा है और आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब नौजवान इन नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो उन्हें जेल में डाल दिया जाता है। उमर-शरजील का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बिना किसी ट्रायल के वे छह साल से जेल में बंद हैं। नीरज कुमार ने कहा कि आज देश में रोजगार अगर कहीं बचा है तो वह भाजपा-आरएसएस के नफरती अभियानों में है। चुनावी प्रक्रिया पर कब्जा करने की कोशिशें जारी हैं ताकि कॉरपोरेट घरानों की सेवा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने चार लेबर कोड लागू करने को मजदूरों और नौजवानों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया और कहा कि मनरेगा को कमजोर कर ग्रामीण मजदूरों से रोजगार की गारंटी छीनी जा रही है, जबकि मजदूर 600 रुपये दैनिक मजदूरी की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने कहा कि मोदी सरकार देशभर में नफरत का माहौल बनाने के लिए असंवैधानिक कदम उठा रही है। उन्होंने जम्मू के एक मेडिकल कॉलेज का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल इसलिए कॉलेज बंद कर दिया गया क्योंकि वहां 50 में से 48 छात्र मुस्लिम थे। उन्होंने इसे शिक्षा और संविधान पर हमला बताया। बिहार की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यहां नौजवानों के सामने रोजगार सबसे बड़ा सवाल है, लेकिन सरकार समाधान देने के बजाय दमन की राजनीति कर रही है। उन्होंने नौजवानों से आरवाईए के साथ संगठित होकर आंदोलन तेज करने का आह्वान किया।
बैठक को संबोधित करते हुए सिकटा से पूर्व विधायक बिरेंद्र गुप्ता ने कहा कि देश पर हो रहे हमलों का सबसे मजबूती से मुकाबला नौजवान कर सकते हैं। इसके लिए आरवाईए जैसे क्रांतिकारी संगठन को मजबूत करना समय की जरूरत है।
राज्य सचिव और पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन ने कहा कि बिहार चुनाव के दौरान एनडीए ने नौजवानों से 1 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द रोजगार बहाली की घोषणा नहीं की तो नौजवान सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि आरवाईए रोजगार, शिक्षा और सामाजिक न्याय के सवाल पर पूरे बिहार में व्यापक आंदोलन खड़ा करेगा और बजट सत्र के दौरान पटना मार्च को ऐतिहासिक बनाया जाएगा
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