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यूजीसी रेगुलेशन लागू करने की मांग पर पटना में राजभवन मार्च, हजारों छात्र-नौजवान उतरे सड़कों पर:

  • Mar 19
  • 3 min read
यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लागू करने, SC/ST/EBC/BC वर्गों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी बनाने तथा संसद से रोहित एक्ट बनाने की मांग को लेकर बुधवार को राजधानी पटना में हजारों छात्र-नौजवानों ने आक्रोशपूर्ण राजभवन मार्च निकाला। ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले आयोजित इस मार्च में आरवाईए,आइसा सहित कई अन्य संगठनों के विभिन्न जिलों से आए छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता ने भाग लिया यह मार्च गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से शुरू होकर जेपी गोलंबर तक पहुंचा,जहां पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को तोड़ते हुए जुलूस डाकबंगला चौराहा पहुंचा वहां भी पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की हुई एवं कई छात्र युवा नेताओं को हिरासत में लिया गया जहां सभा आयोजित की गई।
वक्ताओं ने कहा कि देश में शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक असमानता लगातार बढ़ रही है और जातिगत भेदभाव की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। ऐसी स्थिति में यूजीसी रेगुलेशन को लागू करना बेहद जरूरी है ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही रोहित एक्ट बनाकर वंचित तबकों के छात्रों को न्याय और सुरक्षा देने की जरूरत है। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार की नीतियां शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक न्याय को कमजोर कर रही हैं। नई शिक्षा नीति 2020 के जरिए शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे गरीब, दलित, आदिवासी और पिछड़े तबकों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच मुश्किल होती जा रही है। शिक्षा व्यवस्था को कॉरपोरेट हितों के हवाले करने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक और समावेशी शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि बिहार विधानसभा द्वारा पारित SC/ST/EBC/BC वर्गों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू किया जाना चाहिए। साथ ही निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में भी आबादी के अनुपात में आरक्षण लागू करने की मांग की गई। कहा कि आरक्षण केवल सामाजिक न्याय का साधन ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों को बराबरी का अवसर देने का संवैधानिक अधिकार है। प्रदर्शनकारियों ने संविधान विरोधी बताते हुए आर्थिक आधार पर दिए गए EWS आरक्षण को समाप्त करने की भी मांग उठाई। इसके साथ ही कोलेजियम सिस्टम को खत्म कर न्यायपालिका में भी सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि आज देश में सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उनका आरोप था कि केंद्र की मोदी सरकार सामाजिक न्याय की अवधारणा को कमजोर कर रही है और शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों को सीमित करने वाली नीतियां लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो समाज में असमानता और बढ़ेगी। सभा में यह भी कहा गया कि नई शिक्षा नीति 2020 और VBSA बिल जैसे कदम गरीब और वंचित वर्गों के हितों के खिलाफ हैं, इसलिए इन्हें वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी रेगुलेशन लागू नहीं किया गया और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल आरक्षण का सवाल नहीं बल्कि समान अवसर, सम्मान और न्यायपूर्ण शिक्षा व्यवस्था के लिए चल रही व्यापक लड़ाई का हिस्सा है। मार्च में पटना, बक्सर, छपरा, सिवान, भोजपुर, अरवल, भागलपुर, जहानाबाद, बेगूसराय, रोहतास, समस्तीपुर, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, दरभंगा, मधुबनी, गया और मुजफ्फरपुर सहित बिहार के विभिन्न जिलों से हजारों छात्र-नौजवान शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने कहा कि सामाजिक न्याय, समान शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
 
 
 

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