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लखनऊ में आरवाईए की राष्ट्रीय कार्यशाला व परिषद बैठक से बनाई गई आंदोलन की योजना।

  • 2 hours ago
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NTA को खत्म करने व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग तेज की गई।


4 जून को लखनऊ में इंकलाबी नौजवान सभा की दो दिवसीय कार्यशाला और राष्ट्रीय परिषद बैठक सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए राष्ट्रीय परिषद सदस्यों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के पहले दिन एक राष्ट्रीय युवा कार्यशाला का आयोजन किया गया, जबकि दूसरे दिन राष्ट्रीय परिषद की औपचारिक बैठक आयोजित हुई।
राष्ट्रीय युवा कार्यशाला में भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव कॉ. दीपांकर भट्टाचार्य, जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार, आरवाईए के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मधुरिमा कुंडू सहित अन्य नेताओं ने भाग लिया। कार्यशाला में देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, युवाओं के समक्ष मौजूद चुनौतियों तथा नौजवान आंदोलन की दिशा और कार्यभार पर विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कॉ. दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा की डबल और ट्रिपल इंजन सरकारें रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सवालों पर पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण और बढ़ती सामाजिक-आर्थिक असमानता ने देश के युवाओं और मेहनतकश जनता के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटालों को युवाओं के भविष्य पर हमला बताते हुए कहा कि सरकार ने यदि कोई रिकॉर्ड बनाया है तो वह पेपर लीक का रिकॉर्ड है। उन्होंने नौजवानों से भगत सिंह और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेकर लोकतंत्र, संविधान, शिक्षा और रोजगार की रक्षा के संघर्ष को मजबूत करने का आह्वान किया।

जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार ने लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते हमलों और सत्ता के केंद्रीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए छात्रों, युवाओं, मजदूरों और किसानों के साझा प्रतिरोध को मजबूत करना होगा। कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने अनुभव, सवाल और सुझाव रखे।
आरवाईए के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार ने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए युवाओं के व्यापक संगठन निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पेपर लीक, एनटीए की विफलताओं और शिक्षा व्यवस्था के बढ़ते संकट के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने बुलडोजर राजनीति, श्रम कानूनों पर हमले, निजीकरण और आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ संघर्ष को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मधुरिमा कुंडू ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने तथा महिला आरक्षण कानून के तहत 33 प्रतिशत आरक्षण को अविलंब लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि महिलाओं की समान और स्वतंत्र राजनीतिक भागीदारी लोकतांत्रिक समाज निर्माण की महत्वपूर्ण शर्त है।

दूसरे दिन आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में संगठन के पिछले कार्यकाल की समीक्षा, विभिन्न राज्यों की रिपोर्टों तथा वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति पर गंभीर चर्चा की गई। परिषद ने माना कि देश में बढ़ती बेरोजगारी, पेपर लीक, नौकरियों में बढ़ते ठेकाकरण, शिक्षा के निजीकरण और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमलों के खिलाफ व्यापक जनसंघर्षों को विकसित करने की आवश्यकता है। बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों, संगठन निर्माण तथा अभियान संबंधी अनुभवों को साझा किया।

राष्ट्रीय परिषद ने आगामी दौर के लिए महत्वपूर्ण सांगठनिक और राजनीतिक कार्यभार तय किए। बैठक ने निर्णय लिया कि सम्मानजनक रोजगार, पेपर लीक के खिलाफ न्याय, शिक्षा के अधिकार तथा नौजवानों के लोकतांत्रिक अधिकारों के सवालों को केंद्र में रखते हुए देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा। साथ ही संगठन को गांवों, कस्बों, शिक्षण संस्थानों और कार्यस्थलों तक विस्तारित करते हुए 3 लाख नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

राष्ट्रीय परिषद ने यह भी निर्णय लिया कि शहीद अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, रामप्रसाद बिस्मिल और ठाकुर रोशन सिंह के शहादत दिवस के अवसर पर आगामी 19-20 दिसंबर 2026 को बिहार में आरवाईए का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन की तैयारी को पूरे देश में व्यापक सदस्यता अभियान, राजनीतिक-सांगठनिक पहलों और जन आंदोलनों के विस्तार के साथ जोड़ा जाएगा।
बैठक ने संकल्प लिया कि आरवाईए भगत सिंह, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा देश की क्रांतिकारी-जनवादी परंपराओं से प्रेरणा लेते हुए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, समता, आजादी, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष को और मजबूत करेगी तथा भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ व्यापक नौजवान आंदोलन खड़ा करेगी।

 
 
 

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