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अग्निपथ योजना के खिलाफ आइसा- आरवाइए का बिहार बंद रहा असरदार

  • Dec 22, 2023
  • 4 min read

मोदी सरकार द्वारा सेना में अनुबंध प्रणाली लाने वाली अग्निपथ योजना को अविलंब वापस लेने के सवाल पर बिहार के छात्र-युवा संगठन आइसा- आरवाईए, रोजगार संघर्ष संयुक्त मोर्चा और सेना भर्ती जवान मोर्चा के आह्वान पर ऐतिहासिक रहा 18 जून 2022 का बिहार बंद।


आंदोलन से घबराई सरकार ने राज्य के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवा बंद कर देने, प्रदर्शन को रोकने के लिए धारा 144 लगा दिए जाने और पुलिस की भारी बंदोबस्ती के बावजूद बिहार बंद को जनता का व्यापक समर्थन मिला. स्वतःस्फूर्त तरीके से राजधानी पटना सहित राज्य के अधिकांश शहर बंद रहे. कई जिलों में आंदोलनकारियों नौजवानों को पुलिस की बर्बरता का भी सामना करना पड़ा।

18 जून को अहले सुबह से ही आरा, बक्सर, पटना , सिवान, छपरा, अरवल , नालंदा , गया , जहानाबाद , मुंगेर , वैशाली , बेतिया, मुजफ्फरपुर , समस्तीपुर , दरभंगा , बेगुसराय , सहरसा , सुपौल , कैमूर , भागलपुर सहित अन्य जिलों में आइसा - आरवाईए के कार्यकर्ता जाॅब के नाम पर जुमला- बहाली के नाम पर रिटायर्मेंट नहीं चलेगा ! अग्निपथ भर्ती योजना' वापस लो ! सेना की ताकत और मनोबल से खिलवाड़ बंद करो । अग्निपथ योजना' का विरोध कर रहे आंदोलनकारियों पर पुलिसिया दमन बंद करो । चार साल की संविदा पर सेना में बहाली की योजना 'अग्निपथ' वापस लो ।ठेका पट्टा पर नहीं, सम्मानजनक रोजगार की गारंटी करो ।सेना में खाली सभी पदों पर अविलंब स्थाई बहाली प्रक्रिया शुरू करो । नौजवानों के सम्मान व रोजगार से खिलवाड़ करने वाली मोदी सरकार होश में आओ जैसे गगन भेदी नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर कर नेशनल और स्टेट हाइवे को जाम कर दिया।
बंद के दौरान पटना में पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज का प्रयोग किया. आरवाईए के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार,आइसा महासचिव व पालीगंज विधायक संदीप सौरभ आइसा के बिहार अध्यक्ष विकास यादव, आइसा नेता कुमार दिव्यम आदि नेताओं के नेतृत्व विभिन्न छात्र-युवा संगठनों ने पटना विश्वविद्यालय गेट से बंद के समर्थन में जुलूस निकाला. इस जुलूस को कारगिल चौक पर पुलिस ने रोक दिया. बंद समर्थक डाकबंगला चैराहे की तरफ बढ़ना चाहते थे, उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज का प्रयोग किया और फिर विधायक संदीप सौरभ, विकास यादव, कुमार दिव्यम, अनिमेष चंदन और आशीष कुमार को जबरदस्ती सड़क से उठाकर गिरफ्तार करते हुए गांधी मैदान थाना ले जाया गया.

इस आंदोलन के मजबूत केंद्र के बतौर उभरे आरा में बंद का सर्वाधिक प्रभाव रहा. सेना भर्ती जवान मोर्चा के संयोजक व भोजपुर के युवा लोकप्रिय नेता राजू यादव, आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अगिआंव विधायक मनोज मंजिल, आरवाईए के राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन, आइसा के राज्य सचिव सबीर कुमार आदि नेताओं के नेतृत्व में हजारों की तादाद में सेना भर्ती के अभ्यर्थी व आम नौजवानों ने मार्च निकाला. यह मार्च शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरा और फिर रेलवे स्टेशन के पास सभा करते हुए आंदोलन को तबतक जारी रखने का आह्वान किया गया जबतक कि सरकार अग्निपथ योजना को पूरी तरह से रद्द नहीं कर देती.
मुजफ्फरपुर में मुजफ्फरपुर-दरभंगा एनएच 57 को बोचहां में बंद समर्थकों ने 3 घंटे तक जाम रखा. शहर में आइसा-इनौस के नेतृत्व में विशाल जुलूस निकला, जो छोटी कल्याणी, केदारनाथ, जवाहर लाल, सरैया गंज टावर, छाता बाजार, सुता पट्टी होते हुए सभा में तब्दील हो गई. बक्सर के नवानगर के सोनबरसा बाजार में करीब ढाई घंटे तक आरवाईए के राज्य उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार के नेतृत्व में सड़क जाम रहा. यहां पुलिस के साथ बंद समर्थकों की झड़प भी हुई.

सिवान में आरवाईए के सम्मानित राष्ट्रीय अध्यक्ष जिरोदई विधायक अमरजीत कुशवाहा के नेतृत्व में शहर में विशाल जुलूस निकला. दरभंगा में आइसा-इनौस के नेतृत्व में मिर्जापुर चौक से विश्वविद्यालय परिसर तक जुलूस निकालकर सड़क जाम किया गया. समस्तीपुर में बंद समर्थकों ने शहर के स्टेडियम गोलबंर से जुलूस निकाला, लेकिन जुलूस को निकलते ही बड़ी संख्या में तैनात पुलिस बल ने रोक दिया. मधेपुरा में बंद समर्थकों ने कर्पूरी चौक को घंटों जाम रखा.

अरवल में सैकड़ों बंद समर्थकों ने पटना-औरंगाबाद रोड को भगत सिंह चौक पर जाम किया और फिर ब्लाॅक परिसर में विशाल सभा आयोजित की. जहानाबाद में आइसा-आरवाईए कार्यकर्ताओं ने पटना-गया रोड पर मार्च किया और अरवल चैक को जाम कर दिया. गया मे अंबेदकर पार्क से मार्च करते हुए टावर चैक पर सभा आयोजित की गई. भागलपुर, पूर्णिया, मधुबनी, मोतिहारी, कैमूर, बेगूसराय, भागलपुर, सहरसा, सौपुल आदि जिलों में भी बंद का व्यापक समर्थन दिखा.

बंद के दौरान आइसा - आरवाईए के नेताओं ने अग्निपथ योजना को युवाओं के साथ क्रूर मजाक और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाला बताया कहा की यह देश के युवाओं को बेरोजगारी में धकेलने व देश की सुरक्षा को कमजोर करने वाली अग्निपथ योजना के खिलाफ छात्र-युवा आक्रोश को आज पूरा देश देख रहा है. लेकिन इसे रद्द करने की बजाए मोदी सरकार इसमें चंद बदलाव कर देश को गुमराह करना चाहती है. इसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा.

यह योजना एक तरफ युवाओं के साथ क्रूर मजाक है तो दूसरी ओर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है. सेना की पूरी सरंचना को तहस-नहस करने वाली इस योजना को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा. सेना के रिटायर्ड अधिकारी भी इसकी खुलकर मुखालफत पर उतर आए हैं. यह कैसा मजाक है कि महज 4 साल काम करने के बाद बहाली की उम्र में ही युवा रिटायर्ड कर दिए जाएंगे. इस योजना के आने के पहले एयरफोर्स की बहाली में दो परीक्षाओं को पास कर चुके और आर्मी की बहाली में फाइनल कट ऑफ का इंतजार कर रहे हजारों युवाओं को भी इसी दायरे में धकेल दिया गया है. इसके खिलाफ आज पूरे देश में छात्र-युवाओं का तीखा आंदोलन शुरू हो चुका है और देश का कोना-कोना सुलग उठा है.

मोदी सरकार न केवल अग्निपथ योजना की आड़ में युवाओं से धोखेबाजी कर रही है, बल्कि प्रत्येक साल दो करोड़ नौकरियों का उसका वादा भी छलावा साबित हुआ है. अब यह सरकार 2024 के चुनावों से पहले दस लाख रिक्तियां बिना किसी आधार के भरने की बात कह रही है. सरकार की इस जुमलेबाजी-धोखेबाजी के खिलाफ छात्र-युवाओं ने निर्णायक लड़ाई के लिए कमर कस लिया है.

- वतन कुमार
 
 
 

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