देश को है क्रन्तिकारी नौजवान आन्दोलन की जरूरत...
- Jun 19
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Updated: Jun 29

हमारा देश भारत दुनिया का सबसे युवा देश है यहाँ 65 % आवादी 35 साल से कम उम्र की है. किसी भी देश का डेमोग्राफिक डेविडेंट उस देश के तरक्की का रास्ता खोलता है. लेकिन यह विडंबना ही है कि हर साल 1.2 से 1.5 करोड़ नौजवान लेबर मार्किट में प्रवेश करते हैं. जिसमें से बहुत कम नौजवानों को रोजगार मिल पाता है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 83% बेरोजगार युवा 15-29 वर्ष की आयु के हैं। यानी हर 5 बेरोजगारों में से 4 युवा हैं. भारत के युवा देश की ताकत हैं जिनके दम पर देश को तरक्की के रास्ते ले जाया जा सकता है. दुर्भाग्य यह है कि हम युवाओं को हुकूमत कॉकरोच और परजीवी समझ बैठी है. हमारी सरकार हमें नफ़रती बनाकर हमें कमजोर, कायर, बुझदिल व मजबूर बनाने के अभियान पर है ताकि अपने यार अडानियों की खिदमत में हमें पेश किया जा सके और 10 से 20 हज़ार रुपये तक में 12-12 घंटा तक काम करें जिससे इनके यार दानियों को अधिक से अधिक व्यक्तिगत मुनाफा कमाया जा सके.
कॉकरोच-परजीवी” मानसिकता: हमारी सरकार असल में हमें कॉकरोच और परजीवी ही देखना-समझना चाहती है। तभी तो ये हमारे भविष्य के अब तक के मौजूद अवसरों को हमसे छीन कर हमें अदानियो के हवाले कर देना चाहते हैं।ये चाहते हैं कि हम पहले इनके नफ़रत के कारोबार का चालक शक्ति बनें,समाज में नफ़रत फैलायें और इनको क़ौमी नफ़रत पर सवार होकर सत्ता पर क़ब्ज़ा करने में मददगार बनें। हमें ये कॉकरोच समझते हैं तभी तो ये हमारे बेहतर भविष्य के लिए पहले से मौजूद नौकरियों के अवसरों को हमसें छीन कर, हमारे बहालियों के पेपर लीक करा कर, 8 घंटा काम के अधिकार को ख़त्म कर, कार्यस्थल पर अपने अधिकारों के हनन पर आवाज़ उठाने वालीं यूनियन के प्रावधान को ख़त्म कर, ग्रामीण क्षेत्र के लिए 100 दिन काम का अधिकार देने वाला क़ानून मनरेगा को ख़त्म कर वो हम पर कीटनाशक छिड़क रहे हैं। सरकार बहादुर की दिक़्क़त यह है की हम कॉक्रोचों की संख्या सत्तर से अस्सी करोड़ है जो एक दिन मुट्ठी तान कर खड़े हो जायें तो इनकी हुकूमत को हिलने लगेगी।
हम भारत के “कॉकरोच” और हमारा भविष्य: मोदी सरकार हम नौजवानों को नए भारत का ख़्वाब दिखा कर सत्ता में आई। हमने देखा कि सत्ता में आते ही एक-एक कर हमारे अवसरों को नीलम करना शुरू कर दिया।रेलवे, जो हर साल 30 से 40 हजार नौजवानों को रोजगार देता था, को बेचा जा रहा है। रेलवे सहित तमाम सरकारी संस्थानों, संस्थाओं व कंपनियों को बेच कर रोजगार के अवसरों को खत्म किया जा रहा है। बीएसएनएल, एमटीएनएल, एलआईसी, कोल इंडिया, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, ओएनजीसी, हेल, भेल, सेल, हाइवे, पाइपलाइन सहित देश के 100 से अधिक सरकारी संस्थानों को नीलामी के बाज़ार में रख दिया गया है और उसकी बोलियाँ लगाई जा रही है। नौकरी के नाम पर नौजवानों के पास सिर्फ़ आउटसोर्सिंग के माध्यम से ठेके-पट्टे के रह गए हैं। जहां शिक्षित युवाओं को न्यूनतम मज़दूरी भी नहीं मिलती, इसके लिए आवाज़ उठाने के मंच ट्रेड यूनियन के अधिकार को भी छीन लिया गया।





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